रविवार, 22 मार्च 2020

Asteroid

Fear fact
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पृथ्वी की ओर बढ़ रहा एक बड़ा 'खतरा', NASA ने किया आगाह

नासा के मुताबिक, ये एस्टेरोइड 21 और 22 मार्च के बीच पृथ्वी की कक्षा के बेहद पास से गुजरेंगे।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने एक बड़े खतरे को लेकर आगाह किया है, जोकि धरती की तरफ आ रहा है। नासा ने कहा है कि चार नए एस्टेरोइड बड़ी ही तेज गति से धरती की ओर बढ़ रहे हैं। ये चारों एस्टेरोइड धरती के बेहद करीब से जरूर गुजरेंगे, लेकिन हालांकि उसने उम्मीद भी जताई है कि इससे धरती (पृथ्वी) को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा।

नासा के मुताबिक, ये एस्टेरोइड 21 और 22 मार्च के बीच पृथ्वी की कक्षा के बेहद पास से गुजरेंगे। इन चारों एस्टेरोइड को 020 FK, 2020 FS, 2020 DP4 और 2020 FF1 नाम दिए गए हैं। इनमें से 2020 FK सबसे छोटा एस्टेरोइड है, जिसका डायमीटर सिर्फ 43 फीट है।

कहा जा रहा है कि रविवार यानी 22 मार्च को सबसे बड़ा एस्टेरोइड 2020 DP4 धरती के करीब पहुंचेगा। ये चारों में सबसे बड़ा है और इसका डायमीटर 180 फीट है। वहीं 2020 FF1 एस्टेरोइड का डायमीटर 48 फीट है। भारतीय समय के मुताबिक, 23 मार्च को 2020 DP4 रात 12 बजकर 4 मिनट पर गुजरेगा।

Be alert for corona..... It's not easy (fear fact)

ये ट्विटर थ्रेड (मैसेज श्रंखला) है इटली के लोगों की. समझिये कि हमारा और आपका सामना किस से होने वाला है
पूरा पढ़ना बहुत ही critical टाइम है हम सब को सतर्क रहना है क्योंकि बाक़ी सारी चीजें इक महीने के बाद भी कर सकते ह अगर स्वस्थ रहे तो।

अगर आप अभी भी अपने दोस्तों के साथ घूम  रहे हैं, होटल जा रहे हैं, पार्टी कर रहे हैं और ऐसे दिखा रहे हैं जैसे ये (कोरोनावायरस) आपके लिए कोई बड़ी मुसीबत नहीं है, तो आप बहुत बड़े भ्रम में हैं.. अपने आप को संभाल लीजिये.. नीचे का सारा मैसेज एक इटालियन लोगों द्वारा पोस्ट किया गया है.. जो कुछ भी उन्होंने जैसा भी लिखा है उसे वैसा ही लिखा जा रहा है:

“सारी दुनिया के लिए सन्देश,, जिन्हें ये पता नहीं है कि उनका सामना किस आपदा से होने वाला है”

जैसा कि मैं समझता हूँ इस वक़्त सारी दुनिया को पता है कि इस वक़्त सारा इटली क्वारंटाइन किया जा चूका है.. यानि उसे पूरी तरह से बंद किया जा चुका है.. ये स्थिति बहुत बुरी है.. मगर उन लोगों के लिए ज़्यादा बुरी है जो ये सोचते हैं कि ये उनके साथ नहीं होगा

हमे पता है कि आप कैसा सोच रहे हैं.. क्यूंकि हम भी पहले ऐसे ही सोच रहे थे..

आईये देखें कि ये सब कैसे शुरू हुवा:

स्टेज प्रथम (पहला चरण):

आपको पता होता है कि कोरोना वायरस ऐसी कोई चीज़ है.. मगर आपके देश में ये अभी अभी दिखना शुरू हुवा है.. इसलिए आप सोचते हैं कि डरने की कोई बात नहीं हैं.. क्यूंकि ये बस एक तरह का ज़ुकाम है.. और वैसे भी मैं 75+ साल का हूँ  नहीं इसलिए मुझे इस से क्या डरना

फिर प्रथम चरण आगे बढ़ता है:

और आप सोचते हैं कि ये क्या हर कोई पागल  हो रहा है मास्क और टॉयलेट पेपर के लिए.. ऐसा कुछ तो होने वाला है नहीं.. मेरी ज़िन्दगी तो आराम से चलती रहेगी

फिर आता है..

स्टेज द्वितीय (दूसरा चरण)

धीरे धीरे..  देश में मरीजों की संख्या बढ़ने लगती है.. और सरकार एक दो शहरों कि सीमाएं प्रतिबंधित कर देती है.. और आपको ये समझाती है कि डरने की कोई बात नहीं है.. सब कुछ ठीक है (22 फ़रवरी को ऐसा इटली में हुवा था)

द्वितीय चरण यानि दूसरा चरण आगे बढ़ता है:

कुछ लोगों की  मौतें होती हैं.. मगर वो सब बूढ़े लोग होते हैं.. और मीडिया उस पर हाय तौबा मचाता है... हम सोचते हैं कि ये अच्छी बात नहीं है.. लोग अपने दोस्तों यारों से मिलते रहते हैं.. नार्मल ज़िन्दगी चलती रहती है.. और हमे ये लगता है कि हमे कुछ नहीं होगा

त्रित्तीय चरण (तीसरा चरण)

धीरे धीरे संक्रमित लोगों का आंकडा बढ़ने लगता है.. एक दिन में ही दुगने लोग संक्रमित हो जाते हैं.. मौतों का आंकड़ा बढ़ जाता है.. और सरकार चार बड़े इलाक़ों को प्रतिबंधित कर देती है जहाँ से सब से ज्यादा केस हैं (ये 7 मार्च को इटली में होता है).. फिर इटली के पच्चीस 25% लोगों को घरों में बंद कर दिया जाता है

फिर आता है..

स्टेज तृतीय (तीसरा चरण)

फिर कुछ क्षेत्रों में स्कूल, बार और रेस्टोरेंट बंद कर दिए जाते हैं.. मगर ऑफिस अभी भी खुले हैं.. सरकारी नियमों को मीडिया और अखबार पहले ही प्रकाशित कर देते हैं

स्टेज तृतीय आगे बढ़ता है:

इटली के क़रीब दस हज़ार लोग, जिन्हें दूसरे  इलाक़ों में सरकार ने रोक कर रखा था वो एक ही रात में वहां से निकलकर अपने अपने घर वापस पहुँच जाते हैं.. और इटली के लगभग पिछत्तर प्रतिशत लोग अपने रोज़मर्रा के कामों में व्यस्त रहते हैं

स्टेज तृतीय यानि तीसरा चरण और आगे बढ़ता है:

इटली के लोग अभी भी इस वायरस की आपदा नहीं समझ पा रहे हैं.. हर जगह इटली में लोगों को ये बताया जा रहा है कि थोड़ी थोड़ी देर में अपने हाथ धुलें.. लोग ग्रुप में या भीड़ में न खड़े हों.. टीवी पर हर दस मिनट में ये समझाया जा रहा है.. मगर ये बातें लोगों के दिमाग़ में नहीं बैठ रही हैं
फिर आता है..

स्टेज चतुर्थ (चौथा चरण):

इटली में हर जगह स्कूल और कॉलेज कम से कम  एक महीने के लिए बंद कर दिए गए हैं.. नेशनल हेल्थ इमरजेंसी लगा दी जाती है.. सारे अस्पतालों को ख़ाली करवा के कोरोनावायरस के मरीजों के लिए जगह बना दी जाती है

स्टेज चतुर्थ (चौथा चरण) और आगे बढ़ता है:

अब इटली में डॉक्टर और नर्सों की कमी पड़ने लगी है.. अब जितने भी डॉक्टर रिटायर हो चुके हैं उन्हें भी वापस नौकरी पर बुला लिया जाता है.. जिस छात्रों कि डॉक्टरी की पढाई का दूसरा साल हुवा है उन्हें भी नौकरी पर बुला लिया जाता है.. किसी भी डॉक्टर और नर्स के लिए कोई भी शिफ्ट नहीं है.. चौबीस घंटे काम करना है सबको अब.. डॉक्टर और नर्स भी संक्रमित हो रहे हैं अब और  उन लोगों से उनके परिवारों को भी वायरस अपनी चपेट में ले रहा है


स्टेज चतुर्थ (चौथा चरण) और आगे बढ़ता है:

अब निमोनिया के बहुत ही ज्यादा मरीज़ बढ़ गए हैं... और बहुत सारे लोगों को ICU की ज़रूरत है और अब ICU में सबके लिए जगह नहीं है.. इटली में अब वो स्थिति आ चुकी है जहाँ डॉक्टर अब सिर्फ़ उन्हीं का इलाज कर रहे हैं जिनके बचने की उम्मीद होती है.. मतलब अब बूढ़े, और अन्य बीमारियों से जूझ रहे लोगों का इलाज डॉक्टर नहीं कर पा रहे हैं क्यूंकि अब डॉक्टर को क्रोना  वायरस  वाले मरीजों को ही बचाना है.. क्यूंकि अब अस्पताल में सभी के लिए जगह नहीं बची है

स्टेज चतुर्थ (चौथा चरण) आगे बढ़ता है:

अब लोग मर रहे हैं क्यूंकि अस्पतालों और ICU में जगह नहीं है.. मेरे एक डॉक्टर दोस्त ने मुझे कॉल कर के बताया कि उसने तीन लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया क्यूंकि जगह नहीं थी.. नर्स रो रही हैं क्यूंकि वो मरते हुवे लोगों के लिए कुछ नहीं कर सकती हैं सिवाए उन्हें ऑक्सीजन देने के

मेरे एक दोस्त का रिश्तेदार कल मर गया क्यूंकि उसका इलाज नहीं हो पाया.. अब क्रोना वायरस हर तरफ़ पूरी तरह से फैल चुका है

फिर आता है..

स्टेज पांच (पाँचवाँ चरण):

याद कीजिये उन बेवकूफों को जिन्हें सरकार ने शुरुवात इटली के कुछ राज्यों में रोक के रखा था, क्वारंटाइन किया था मगर वो अपने अपने घर वापस चले आये थे? उन्हीं की वजह से अब सारी इटली को मार्च 9 को क्वारंटाइन कर दिया गया

अब सरकार का एक ही लक्ष्य है कि कैसे इसे ज्यादा से ज्यादा फैलने से रोका जाय

लोगों को अपने काम पर जाने दिया जा रहा है.. ज़रूरी सामान की खरीदारी करने दी जा रही है.. व्यापार सारे खोल के रखे गए हैं.. क्यूंकि अगर ऐसा न किया तो सारी इकॉनमी धराशायी हो जायेगी.. मगर अभी भी आप अपने इलाक़े से बाहर नहीं जा सकते हैं जब तक आपके पास उसके लिए कोई बहुत ज़रूरी वजह न हो

मगर अभी भी एक समस्या बनी हुई है.. क्यूंकि कुछ लोग समझते हैं कि उन्हें कुछ नहीं होगा.. वो अभी भी दोस्तों के साथ बाहर जा रहे हैं... घूम रहे हैं ग्रुप में.. शराब पी रहे हैं और ऐश कर रहे हैं

फिर आता है..

स्टेज छः (छठां चरण):

दो दिन पहले ये घोषणा कर दी गयी कि अब सारे व्यापार, शौपिंग माल, रेस्टोरेंट, बार और हर तरह की दुकाने बंद रहेंगी.. सिर्फ़ सुपर मार्केट और दवाखाने के अलावा.. और अब आप सिर्फ़ तभी अपने इलाके से कहीं बाहर जा सकते हैं अगर आपके पास उसकी कोई बहुत बड़ी वजह है और उसके लिए आपके पास एक सर्टिफिकेट होना चाहिए

उस सर्टिफिकेट में आपके बारे में सारी जानकारी होती है.. जिसमे आपका नाम, पता और आप कहाँ से आ रहे हैं और कहाँ जा रहे हैं ये लिखा होता है

जगह जगह पुलिस के चेक पॉइंट बने हैं जहाँ आपको चेक किया जाता है

इटली में अगर अब आप अपने घर से बाहर अब पकडे जाते हैं तो आपके ऊपर 206 पौंड का जुर्माना लगाया जाता है.. अगर आप बहार निकलते हैं और आप क्रोना वायरस से संक्रमित हैं तो आपको एक से लेकर बारह साल की जेल होगी

                                                                               आख़िरी सन्देश:

ये मैं १२ मार्च को लिख रहा हूं और इस वक़्त तक के ये हालात है जो मैंने ऊपर बताया.. इसका ध्यान रखिये कि ये सब बस हमारे यहाँ दो हफ्ते के अंदर हो गया.. सिर्फ़ पांच दिन लगे स्टेज तीन से आज तक के दिन तक आने में हमे

दुनिया के दूसरे देश अभी धीरे धीरे उन चरणों में पहुँच रहे हैं जिनसे हम गुज़र चुके हैं.. इसलिए मुझे आप लोगों से ये कहना है कि “आपको कोई अंदाज़ा नहीं है कि आप के साथ क्या होने वाला है”

क्यूंकि दो हफ्ते पहले मैं आपके ही जैसा सोचता था और मुझे लगता था कि हमे कुछ नहीं होगा.. और ये सब इस वजह से नहीं हो रहा है कि ये वायरस बहुत खतरनाक है.. बल्कि ये सब इस वजह से हो रहा है कि ये वायरस ऐसी परिस्थितियां पैदा कर देता है जिसका सामना करने में हम सक्षम नहीं हैं

ये देख कर बहुत दुःख हो रहा है क्यूंकि कुछ देश ये सोच रहे हैं कि उनको कुछ नहीं होगा.. और वो इसके लिए ज़रूरी बचाव नहीं कर रहे हैं.. जबकि वो समय रहते अगर बचाव कर लें तो बहुत फायदा होगा

इसलिए.. कृपया अगर आप इसको पढ़ रहे हैं तो सजग हो जाईये.. क्यूंकि इसको इग्नोर करने पर इस समस्या का हल नहीं निकलेगा.. अमेरिका जैसे देशों में ऐसे कितने लोग होंगे जो संक्रमित होंगे और उनका पता नहीं चल पाया होगा

हमारी इटली की सरकार ने इस बारे में बहुत अच्छा काम किया.. और वो ये किया कि उन्होंने पूरी कोशिश की अब इस वायरस को जहाँ भी हो रोक दिया जाए.. उसके लिए उन्हें बहुत कठोर क़दम  उठाये मगर वो सही थे.. चाइना ने भी इस तरह से इस पर क़ाबू पाया था... सारे इलाके बंद कर के लोगों को घरों में क़ैद कर दिया था

सरकार लोगों की मदद कर रही है.. उनके बैंक की किश्त माफ़ करके और लोगों के व्यापार में मदद कर के.. मुझे ये चीज़ परेशान कर रही है कि अगर ये सारे देशों में हो गया तो क्या होगा

इसलिए अगर आप ऐसे इलाक़े में हैं जहाँ आपके आसपास क्रोना वायरस से संक्रमित मरीज़ हैं.. तो आप बस एक या दो हफ्ते हम से पीछे हैं.. और आप हमारी सारी बातों को धीरे धीरे समझेंगे.. इसलिए मेरी आप लोगों से यही गुजारिश हैं कि आप अपना बचाव ख़ुद करें.. और ऐसा व्यवहार मत कीजिये कि आपको कुछ नहीं होगा.. इसलिए अगर आप रह सकते हैं तो “घरों में ही बंद रहिये”

🙏 


સૌથી હિંસક વર્ષ હશે ૨૦૨૦! નોસ્ટ્રાડેમસે કરી છે આ ચોંકાવનારી ભવિષ્યવાણી

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ફ્રાંસ ના એક જાણીતા ભવિષ્યવક્તા માઇકલ ડી નોસ્ટ્રાડેમસે દ્વારા આવનારા ઘણા વર્ષો માટે સદીઓ પહેલા જ અમુક ભવિષ્યવાણીઓ  કરી દીધી હતી. સમગ્ર વિશ્વ ના લોકો તેમની આ ભવિષ્યવાણીઓ પર અતુટ વિશ્વાસ પણ કરે છે. તેનું મુખ્ય કારણ એ છે કે તેમની હાલ સુધી ની તમામ ભવિષ્યવાણીઓ સાચી ઠરી છે. નોસ્ટ્રાડેમસ દ્વારા કરવામા આવેલ સન ૨૦૨૦ માટે ની ભવિષ્યવાણી માનવીઓ માટે માઠા સમાચાર દર્શાવે છે. આ સિવાય ના બીજા ભવિષ્યવક્તાઓ પણ સન ૨૦૨૦ મા વિનાશ ના સંકેત દર્શાવે છે.



નોસ્ટ્રાડેમસ ની ભવિષ્યવાણી મુજબ સન ૨૦૨૦ મા સમગ્ર વિશ્વ ખત્મ થવા ના સંકેત પણ છુપાયેલા છે. તો ચાલો જાણીએ નોસ્ટ્રાડેમસ દ્વારા કરવામા આવેલ સન ૨૦૨૦ ની ભવિષ્યવાણી વિષે. નોસ્ટ્રાડેમસ ના કહ્યા મુજબ સન ૨૦૨૦ મા એક નવીન યુગ ની સ્થાપના થશે. તેમણે અનુમાન લગાવ્યું હતું કે ૨૦૨૦ મા ઘણા દેશો વચ્ચે ઘર્ષણ વધશે. આ સાથે જ ૨૦૨૦ મા આખી સદી નું સૌથી મોટું આર્થિક સંકટ પણ આવશે. જો આંકડાઓ ની દ્રષ્ટીએ જોવા જઈએ તો ભારત થી લઇ ને સમગ્ર વિશ્વ ની અર્થવ્યવસ્થા હાલ કફોડી હાલત જેવી છે.



ચીન તેમજ અમેરિકા જેવી મહાસત્તા વચ્ચે વૈપારીક યુદ્ધ ના મંડાણ થઇ ચુક્યા છે. ભારત ની આર્થિક વૃદ્ધિ મા પણ ભારે પછડાટ આવી રહ્યો છે. જો કે ભવિષ્યવાણી મા એ પણ દર્શાવ્યું છે કે ૨૦૨૦ સુધી મા લોકો પહેલા કરતા વધુ જાગૃત થઈ ચુક્યા હશે તેમજ લોકો મા એક નવીન પ્રકાર નો આધ્યાત્મિક ઝુકાવ જોવા મા આવશે. તેમની ભવિષ્યવાણી મુજબ ત્રીજા વિશ્વ યુદ્ધ ના એંધાણ પણ સત્ય સાબિત થઈ શકે છે. સન ૨૦૨૦ મા અમેરિકા દ્વારા એશિયા મા વિશ્વ નુ સૌથી મોટું સૈન્ય અભ્યાસ પણ શરૂ કરવામા આવશે.



જો આ ભવિષ્યવાણી ને ભારત ની હાલ પરિસ્થિતિ સાથે સરખાવીએ તો સન ૨૦૨૦ મા વિશ્વ ના મોટા શહેરો મા ગૃહ યુદ્ધ જેવી સ્થિતિ ઊભી થશે તેમજ લોકો રસ્તાઓ પર ઉતરશે અને હાલ હજુ નવા વર્ષ ની શરૂઆત અગાવ જ અહિયાં CAA તેમજ NRC જેવા નિયમો ના વિરોધ માટે લોકો રસ્તાઓ પર ઉતર્યા છે. આ માટે જ કદાચ નોસ્ટ્રાડેમસે ૨૦૨૦ ને એક ઘણું જ હિંસક વર્ષ ગણાવ્યું હશે. આ સાથે જ તેમની ભવિષ્યવાણી મુજબ ચાલુ વર્ષે દરમિયાન જ રશિયા ના રાષ્ટ્રપતિ વ્લાદિમીર પુતિન ની હત્યા નો પ્રયત્ન થઈ શકે છે.



शनिवार, 21 मार्च 2020

About Corona -19 fear fact

*ધ્યાનથી ધ્યાનથી ધ્યાનથી વાંચજો  અને સાચવજો પ્લીઝ.*

• ઈટાલીની જનસંખ્યા માત્ર 6.5 (સાડા છ) કરોડ છે. ત્યાં દર એક કિલોમીટરમાં એવરેજ 205 લોકો રહે છે.

• માત્ર 35 દિવસ પહેલાં ઇટાલીમાં માત્ર 3 કેસ હતાં, આજે 41000 થી વધુ છે. 41 હજાર.

• માત્ર 30 દિવસ પહેલાં ઇટાલીમાં મૃત્યુઆંક 1 હતો, આજે 3400 થી વધુ છે.

*હવે આપણી વાત કરીએ,*

• ભારતમાં દર એક કિલોમીટરમાં એવરેજ 450થી વધુ લોકો રહે છે. (ઈટાલી 205)

• બોમ્બે જેવા શહેરમાં દર એક કિલોમીટરમાં લગભગ 13000 થી વધુ લોકો રહે છે. હા, તેર હજાર. (ઈટાલી 205)


*હવે રોગની ગંભીરતા સમજો.*

ઈટાલી અને આપણી સ્વાસ્થ્ય સેવાઓ વચ્ચેનો ફરક પણ જાણો. આપણી સ્વાસ્થ્ય અને અન્ય વ્યવસ્થાઓ રોગને *રોકવા* માટે કદાચ સક્ષમ હશે પણ સંખ્યા ભયજનક થાય તો નિવારવા માટે કદાચ ટુંકી પડશે. ગમે તેટલી મહેનત કરશે તો પણ એક લેવલથી ઉપર સરકાર પણ કશું નહીં કરી શકે.

વિચારો, ન કરે નારાયણને ઈટાલીની જેમ થયું તો કેટલા દવાખાનાઓ અને આઇસોલેશન સેન્ટરો ઉભા કરીશું ? એમાં કામ કરતો મેડિકલ સ્ટાફ પણ માણસ છે.

અત્યારે તો એક પકડાય છે એના પરિવાર સહિત તમામ લોકોને અલગ અલગ મુકી દેય છે અને 14 દિવસ ચેકીંગ થાય છે. જો આંકડો ભયજનક સ્થિતિએ પહોંચશે તો
કોણ કોને સંભાળશે ?
કોણ કોને સાચવશે ?
કોણ કોને હોસ્પિટલમાં લઈ જશે ?
કહેવું ન ગમે પણ રસ્તે રઝળતી લાશને કોઈ ઉંચકવા પણ ન આવે એવી સ્થિતિ સર્જાઈ શકે.

ડેંગ્યુ જેવા રોગમાં પણ હોસ્પિટલો ફૂલ થઈ જાય છે. ડેંગ્યુમાં તો જનરલ વૉર્ડમા એકસામટા દર્દીઓને પણ રાખી શકાય છે.

ઉપર આપેલાં તમામ આંકડાઓ અને વર્તમાન પરિસ્થિતિ વિશે એક મિનીટ આંખો બંધ રાખીને વિચારો. તમને ડરાવવા માટે નહીં, ચેતાવવા માટે માહિતી આપી છે.

બહુ દુઃખ છે કે હજુ થવું જોઈએ એટલા સાવચેત આપણે નથી થયાં, ગંભીરતા સમજો અને સ્વાસ્થ્ય વિભાગ તરફથી સમયે સમયે આવતાં આદેશોનું કડકાઈથી પાલન કરો. તમારું જીવન કિંમતી છે.
🙏🙏🙏🙏🙏







Safty solution for corona 19

"सेनेटाइजर"की विधि
तो विधि इस प्रकार है.....
1 लीटर स्प्रिट (कीमत 110 रुपए)
200 ml ग्लिसरीन (60 रुपए)
एक ढक्कन डिटोल का....
महक चाहिए तो आपका पसंदीदा कोई भी इत्र चल जाएगा....
पहले  स्प्रिट व ग्लिसरीन को मिलाइये....
फिर डिटोल मिला दीजिए...
फिर यदि महक चाहिए तो इत्र मिला दीजिए
आपका सेनिटाइजर तैयार हो जाएगा...
मात्र 200 रुपए के आस-पास आपका 1200 ml सेनिटाइजर तैयार हो जाएगा....
जबकि बाजार में 100 ml का  सेनिटाइजर 100 से 150 रुपए तक मे बिक रहा है.....


✔️हम लोग  "फिटकरी"से सेनेटाइजर बना सकते है...
1 लीटर पानी मे 100ग्राम "फिटकरी" डाल 1 ढक्कन "डिटोल",
गाड़ा करने के लिए "ग्लिसरीन"या "एलुविरा" मिलाकर भी "सेनिटाइजर"बना सकते है.....
घर पर तैयार कर महँगाई व कालाबाजारी करने वालो को मात दीजिए....।।

Corona -19

શું ઉનાળામાં વાયરસ ખતમ થઈ જશે ? આ વાયરસ કેટલો સમય બીજી કોઈ સપાટી પર રહી શકે ?
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કોરોના વાઇરસ અંગે હજી દુનિયાના વૈજ્ઞાનિકો જુદા જુદા અંદાજ લગાવી રહ્યા છે, પ્રયોગો દ્વારા આ વાયરસ અંગેની સમજ કેળવાઈ રહી છે.  અત્યારે સોશ્યલ મીડિયામાં એક વાત એવી ફરી રહી છે કે તડકો આવશે અને ઉનાળો શરૂ થઈ ગયો છે એટલે ચિંતા કરવાની જરૂર નથી કે પછી અમુક લોકો કલાકોની ગણતરી દ્વારા કોરોનાને કેવી રીતે હરાવી શકાય એવી વાતો પણ મૂકી રહયા છે.  એ વાત સાચી કે વાયરસ અને ગરમીને ખાસ બનતું નથી, ઊંચા તાપમાન પર વાઇરસ નાશ જ પામે પણ આ વાઇરસ કેટલા તાપમાન પર ટકી શકે છે તે અંગે પણ ચોક્કસ જાણકારી મળી નથી.


મૂળે વાત કરું તો આ વાયરસ કોરોના ફેમિલીનો વાયરસ છે , આ પરિવારના 6 સભ્યોથી આપણે અત્યાર સુધી પરિચિત હતા અને આ 7માં સદસ્ય સાથે હમણાં ડિસેમ્બર 2019માં રૂબરૂ થયા. આના પરિવારના MERS અને SARS ને આપણે અનુક્રમે 2012 અને 2002માં મળી ચૂક્યા છીએ. સાર્સનો ચેપ 8000 જેટલા લોકોને લાગ્યો હતો અને 10 ટકા જેટલા મૃત્યુ પામ્યો હતો. નવેમ્બર 2002ની આસપાસ શરૂ થયેલો સાર્સ જૂન 2003 સુધી ચાલ્યો હતો.  આ નવો કોરોના વાયરસ અને જૂનો સાર્સ ઘણીખરી-લગભગ 70 થી 90 ટકા જેટલી જેનેટિક સમાનતા ધરાવે છે. MERS નો ચેપ 2012મ ફેલાવાનો શરૂ થયો ઇનો ફેલાવાનો દર  ધીમો છે- ડિસેમ્બર 2019 સુધી 2468 જેટલાં કેસ નોંધાયા છે. આ વાયરસમાં મૃત્યુ દર 34 ટકાની આસપાસ છે.  આની પહેલા આપણે બર્ડ ફ્લૂ અને સ્વાઇન ફ્લૂ એવું બધુ સાંભળેલું, આ બધા ઇન્ફ્લુએઝ વાયરસ કહેવાય અને આ વાયરસની ફેમિલી પર આપણે સારું એવું રિસર્ચ કરેલું છે,કોરોના ને આપણે હજી વ્યવસ્થિત રીતે સમજી રહયા છીએ.

એવું કહેવાય છે કે ગરમી આવશે તો   આ વાયરસ જતો રહેશે અને આપણે ચિંતા કરવાની જરૂર નથી –પણ જો આ વાયરસના પિતરાઇ ભાઈ એવા સાર્સની વાત કરીએ તો એણે ઉનાળામાં પણ પોતાનું કૌવત બતાવેલું છે  આ કોરોના વિષે કહીએ તો એ ઈટાલીમાં બી ફેલાયો છે જ્યાં અત્યારે તાપમાન 10-15 degree છે અને ઓસ્ટ્રેલિયામાં પણ ફેલાયો છે જ્યાં અત્યારે ઉનાળો ચાલી રહ્યો છે. ટોમ હેંક્સને ઓસ્ટ્રેલિયામાં ગોલ્ડ કોસ્ટ ફિલ્મના શુર્ટિંગ વખતે જ આ ચેપ લાગ્યો હતો.  સામાન્ય રીતે આપણને શરદી –ઉધરસ કરતાં ફ્લૂના વાયરસ ઠંડીની સીઝનમાં વધુ જોવા મળે- ઠંડુ અને સૂકું વાતાવરણ વધુ અનુકૂળ આવે- પેલા RNAને વીંટાળયેલું પ્રોટીનનું પડ એવા વાતાવરણમાં તૂટે નહીં અને ફ્લૂના વાયરસને આરામથી ઘૂસ મારવા મળે. પણ ગરમી વધે એમ આ વાયરસ નબળો પડે – એટ્લે જ તો એને સિઝનલ ફ્લૂ પણ કહેવાય છે. એ ઋતુના ટાઈમ ટેબલને અનુસરે છે પણ આ કોરોના કોઈ ચોક્કસ ઋતુને અનુસરતો હોય એમ લાગતું નથી અને એટ્લે જ ઉત્તર અને દક્ષિણ બંને ગોળાર્ધમાં પ્રસરી રહ્યો છે.  એટ્લે કદાચ શક્ય છે કે ગરમીના કારણે એ થોડો નબળો પડે પણ સાવ જતો રહેશે એવું માનવા માટે હજી આપણી પાસે પૂરતા પુરાવા નથી. બીજું પેલા ધાબા પર તડકામાં ઊભા રહેવાના મેસેજ ફરે છે -  ઈચ્છા હોય તો શોખથી ઊભું રહેવાય, ચામડી બળશે બીજું કઈ નઇ પણ એનાથી વાયરસ મરી જશે એ વાતમાં કોઈ દમ નથી. શરીરનું સરેરાશ તાપમાન જ 37 ડિગ્રીની આસપાસ હોય છે- અને આ તાપમાનને બહારના કોઈ પણ તાપમાન સાથે લેવા દેવા નથી – એટ્લે શરીરમાં ઘૂસી ગયેલા વાઇરસને બહાર સહારાનું રણ હોય કે એન્ટાર્કટીકા   એનાથી કોઈ મતલબ નથી રહેતો .ધાબા પર જઈ શકાય પણ વાયરસ મરી જશે એવી  માન્યતા સાથે નહીં.


બીજું , સપાટી પર આ વાઇરસ કેટલો સમય રહી શકે એ બાબતે પણ મત-મતાંતર છે પણ તેમ છતાં ફેબ્રુઆરી 2020માં જર્નલ ઓફ હોસ્પિટલ ઇન્ફેકશનમાં પ્રકાશિત એક રિવ્યુમાં સંશોધકોએ કોરોના વાયરસ પરિવારની કોઈ પણ સપાટી પર રહેવાની આદતોની ઉપલબ્ધ વૈજ્ઞાનિક માહિતી ભેગી કરીને  એક સંશોધન રજૂ કર્યું હતું ત્યાર પછી 17 માર્ચે ધ ન્યુ ઈંગ્લેન્ડ જર્નલ ઓફ મેડિસિનમાં આ નવા વાયરસ સંદર્ભે જ અભ્યાસ થયો છે. આ અભ્યાસ મુજબ આ વાઇરસ હવામાં 3 કલાક સુધી રહી શકે છે, તાંબાની સપાટી પર 4 કલાક, પુંઠા પર 24 કલાક સુધી , પ્લાસ્ટિક અને સ્ટીલ પર 72 કલાક સુધી રહી શકે છે. એના પિતરાઇ ભાઈ જેવા સાર્સ અને મર્સ જેવા વાઇરસ 9 દિવસ સુધી એ પ્લાસ્ટિક સ્ટીલ કે કાચની સપાટી પર ટકયા હોવાના દાખલાઓ પણ છે. (ફ્લૂના વાયરસ 48 કલાક સુધી રહી શકે ) હા સંશોધકો એમ બી નોંધે છે કે સપાટીનું તાપમાન 30 ડિગ્રીની આસપાસ હોય તો એને ફાંફા પડે છે. હવે આ સપાટીને કેટલું અને ક્યાં સુધી અડવાથી કેટલા વાયરસ કુદકા મારીને હાથે ચોંટે એ આપણને હજી ખબર નથી પણ આપણે આપણી આસપાસની જગ્યા ચોખી રાખી શકીએ જ. એટલે આપણી આસપાસ ઘરમાં ઑફિસમાં ડિસઇનફેક્ટન્ટથી સફાઈ રાખવી જરૂરી છે.
હું આશા રાખું છુ કે લેટેસ્ટ રિસર્ચના અભ્યાસ પરથી ઉપરની પોસ્ટ તૈયાર કરી છે –સપાટી અને તાપમાન અંગે આ જાણકારી પબ્લિક ડોમેઈનમાં છે - વૈજ્ઞાનિકો પણ તેને સમજવા કોશિશ કરી રહયા છે.  વોટ્સ એપ પર કોઈએ તુક્કા મારીને બનાવેલા ફાલતુ મેસેજ ને વિજ્ઞાન ના સમજો.  સંયમ અને સમજદારીથી કામ લો.   એક માણસની ભૂલ આખા સમાજે ભોગવવી પડે તેવું વર્તન ના કરો. 

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