मंगलवार, 11 नवंबर 2025

किसी दूसरे चैनल पर वो डायनासोर आज भी साँस ले रहे हो



रात के सन्नाटे में, जब ब्रह्मांड अपनी अनंत गहराइयों में सोता नहीं…

कई वैज्ञानिक मानते हैं कि उस अंधेरे में ऐसे रहस्य लिपटे हैं

जिन्हें इंसानी आँखें अभी देख ही नहीं सकतीं।


प्रसिद्ध सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी "मिचियो काकू"एक चौंकाने वाली बात कहते है


संभव है, आपके बिल्कुल पास ही कोई डायनासोर मौजूद हो।

आप बस उसे देख नहीं पा रहे… क्योंकि आप दोनों अलग-अलग फ़्रीक्वेंसी पर कंपन कर रहे हैं।


ज़रा सोचिए…

जैसे रेडियो में अनेक चैनल होते हैं

हर चैनल पर एक अलग दुनिया, एक अलग संगीत।

लेकिन आप वही सुन पाते हैं,

जिस फ़्रीक्वेंसी पर आपका रेडियो ट्यून होता है।

बाक़ी चैनल हवा में तैरते तो रहते हैं,

पर आपकी चेतना उन्हें पकड़ नहीं पाती।

वैसे ही यह ब्रह्मांड भी शायद एक विशाल "कॉस्मिक रेडियो" है।

जहाँ हर चैनल पर एक अलग यूनिवर्स चल रहा हे

अपनी ही ऊर्जा, अपने ही नियम, अपनी ही कहानियाँ लिए हुए।

हम इस समय अपने वास्तविकता चैनल में बंद है


एक ऐसी फ़्रीक्वेंसी पर जो हमारी आँखों, हमारी इंद्रियों और हमारी सोच को सीमित रखती है।

लेकिन कल्पना कीजिए…

अगर कभी हम अपनी चेतना की कंपन आवृत्ति बदल सकें

तो शायद हम उन अदृश्य दुनियाओं की धड़कन सुन पाएं,

उन साए को देख पाएं

जो अभी हमारे ठीक सामने होकर भी हमारी आँखों से परे हैं।


कौन जानता है…

किसी दूसरे चैनल पर

वो डायनासोर आज भी साँस ले रहा हो,

धरती पर वैसे ही घूम रहा हो

जैसे करोड़ों वर्ष पहले घूमता था। 🦕




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