दुनिया के कई बड़े युद्ध केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उनका असर पूरी दुनिया की राजनीति, अर्थव्यवस्था और समाज पर पड़ता है। पश्चिम एशिया में चल रहा ईरान और इज़राइल के बीच तनाव और युद्ध भी ऐसा ही एक संघर्ष है। भले ही भारत इस युद्ध में सीधे शामिल नहीं है, लेकिन इसका प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था, व्यापार, तेल की कीमतों और आम लोगों की जिंदगी पर महसूस किए जा सकता हैं। भारत दुनिया के सबसे बड़े पेमानेमे तेल खरीदने वालो देश में से एक है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 80% से अधिक कच्चा तेल विदेश से खरीदता है
यदि ईरान–इज़राइल युद्ध लंबा चलता है, तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार तेल की कीमतों में हर 10% वृद्धि भारत की GDP वृद्धि दर को 0.20–0.25% तक कम कर सकती है। इसका सीधा असर पड़ेगा पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर, गैस सिलेंडर पर, परिवहन लागत पर और अंत में इसका बोझ आम नागरिक की जेब पर पड़ेगा।
पश्चिम एशिया में एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है Strait of Hormuz इसी रास्ते से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस गुजरता है। भारत के लगभग 60–65% कच्चे तेल की खरीद इसी रास्ते से होती है। यदि युद्ध के कारण यह रास्ता बंद हो जाता है या असुरक्षित हो जाता है, तो तेल की आपूर्ति कम हो जाएगी तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं भारत की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
भारत के ईरान और इज़राइल दोनों देशों के साथ व्यापारिक संबंध हैं भारत ईरान को कई कृषि उत्पादन बेचता है, जैसे बासमती चावल, केला, चाय, सोयाबीन मील वगैरह...
यदि युद्ध लंबा चलता है तो व्यापारिक रास्तों में बाधा आएगी शिपिंग और बीमा लागत बढ़ेगी भारतीय निर्यातकों को नुकसान हो सकता है। तेल की कीमत बढ़ने से भारत की आयात लागत बढ़ जाती है जिससे देश का व्यापार घाटा बढ़ सकता है। इसके कारण रुपये की कीमत गिर सकती है महंगाई बढ़ सकती है सरकार की आर्थिक नीतियों पर दबाव बढ़ सकता है।
जब दुनिया में युद्ध होता है, तो निवेशक अस्थिरता से डरते हैं। ऐसी स्थिति में शेयर बाजार में गिरावट आ सकती है विदेशी निवेश कम हो सकता है उद्योगों की लागत बढ़ सकती है खासकर पेट्रोलियम, परिवहन, केमिकल और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर इसका ज्यादा असर पड़ता है।
भारत के लिए यह युद्ध केवल आर्थिक नहीं बल्कि कूटनीतिक चुनौती भी है। भारत के ईरान के साथ ऊर्जा संबंध हैं इज़राइल के साथ रक्षा और तकनीकी सहयोग है इसलिए भारत को दोनों देशों के बीच संतुलन बनाकर अपनी विदेश नीति चलानी पड़ती है।
ईरान और इज़राइल का युद्ध भले ही हजारों किलोमीटर दूर हो, लेकिन आज की वैश्विक दुनिया में उसका असर हर देश पर पड़ता है। भारत जैसे विकासशील देश के लिए यह युद्ध तेल सुरक्षा, व्यापार, महंगाई और आर्थिक स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। फिर भी भारत अपनी ऊर्जा रणनीति, कूटनीति और वैकल्पिक व्यापार मार्गों के जरिए इस संकट से निपटने की कोशिश कर रहा है।

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