क्या आपने कभी गौर किया है कि किसी महिला की शांत और सौम्य आवाज सुनकर अक्सर मन को एक अजीब सा सुकून महसूस होता है? यह कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा न्यूरोलॉजिकल और इवोल्यूशनरी विज्ञान काम कर रहा है।
दरअसल, महिलाओं की आवाज की फ्रीक्वेंसी और टोन स्वाभाविक रूप से अधिक मेलोडिक यानी मधुर होती है। जब कोई पुरुष या कोई भी व्यक्ति एक शांत महिला की आवाज सुनता है, तो हमारा दिमाग उसे खतरे के अलार्म के बजाय 'सुरक्षा' और 'देखभाल' के संकेत के रूप में प्रोसेस करता है। विकासवादी मनोविज्ञान के अनुसार, इसका सीधा संबंध हमारे जन्म और उससे भी पहले के समय से है, जब गर्भ में एक मां की आवाज हमारे लिए सुरक्षा का पहला और सबसे मजबूत एहसास होती है।
जैसे ही दिमाग इस मेलोडिक आवाज को सुनता है, वह हमारे पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को एक्टिव कर देता है। इसके प्रभाव से शरीर में स्ट्रेस हार्मोन 'कॉर्टिसोल' का स्तर तुरंत गिरने लगता है और 'ऑक्सीटोसिन' (जिसे बॉन्डिंग या फील-गुड हार्मोन कहते हैं) रिलीज होने लगता है। यही वह बायोलॉजिकल प्रक्रिया है जिसके कारण तेज चल रही दिल की धड़कन (Heart Rate) धीमी हो जाती है, नसें रिलैक्स होती हैं और घबराहट या चिंता पल भर में शांत होने लगती है।
स्रोत (Source): यह जानकारी इवोल्यूशनरी साइकोलॉजी (Evolutionary Psychology), ब्रेन इमेजिंग (Brain Imaging) और हमारे श्रवण तंत्र (Auditory Processing) के काम करने के तरीके पर हुए वैज्ञानिक शोधों के तथ्यों पर आधारित है।

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