बुधवार, 12 नवंबर 2025

💔 "अंतिम कमरा" — एक मार्मिक सच्ची कहानी


💔 "अंतिम कमरा" — एक मार्मिक सच्ची कहानी


बूढ़े मेजर जनरल अरविंद सिंह का वह कमरा हमेशा से सबसे शांत हुआ करता था।

कभी वह कमरा उनके युद्ध मेडल, सिरहाने रखी डायरी और सैनिकों की यादों से भरा रहता था

पर आज वही कमरा एक कैदखाने जैसा लगने लगा था।


उनकी टांगें अब उनका साथ नहीं देती थीं।

सफेद बालों में हर दिन थोड़ा और बुढ़ापा उतर आता था।

चलने-फिरने में असमर्थ, पर आत्म-सम्मान अभी भी बरकरार था।


लेकिन घर में अब उनकी ज़रूरत शायद किसी को महसूस नहीं होती थी।


       🏠 बेटों की दुनिया और पिता का अकेलापन


अरविंद सिंह के तीन बेटे थे

अभिषेक, करण और नीलेश।

तीनों की नई-नई शादी हुई थी।

तीनों अपनी-अपनी दुनियाओं में व्यस्त थे,

जहाँ घूमना–फिरना, पार्टी और विदेश यात्राएँ रोज़मर्रा का हिस्सा थे।


एक शाम तीनों पैकिंग कर रहे थे,

उत्साह से भरी उनकी आवाज़ें पूरे घर में गूंज रही थीं

“डैड, हम तीन महीने के लिए जा रहे हैं।"

“आपकी देखभाल नौकर राजू करेगा, बिल्कुल चिंता मत करना!”


अरविंद सिंह ने कमजोर मुस्कान दी।

“ठीक है बेटा… खुश रहो,”

वह इतना ही कह पाए।


उनकी आँखों में हल्का-सा डर जरूर था,

पर बेटों की रफ्तार में उनकी उदासी खो गई।


 🔑 नौकर को दी गई चाभी… और जिम्मेदारी


जाने से पहले अभिषेक ने नौकर राजू से कहा


“राजू, पिताजी को समय पर खाना देना, दवा देना।

हम लौटेंगे तो हमें किसी शिकायत की आवाज़ नहीं सुननी चाहिए।”


राजू ने सिर झुकाकर कहा

“जी साहब।”


घर का एक बड़ा ताला लगाकर

बेटे एयरपोर्ट की ओर रवाना हो गए।


अरविंद सिंह अब कमरे के अंदर अकेले रह गए।

एक खिड़की…

एक पुराना पंखा…

और गहरी खामोशी।


💔 वह बंद दरवाज़ा… और घुटती हुई ज़िंदगी


दिन गुजरते गए।

अरविंद सिंह अपने बिस्तर पर लेटे-लेटे

कभी दीवार को देखते,

कभी खिड़की की तरफ।

पानी पीने के लिए उठ नहीं पाते थे।

किसी को आवाज़ देने की ताकत नहीं बची थी।


राजू रोज़ खाना रखकर जाता था

पर एक दोपहर वह बाज़ार सामान लेने निकला

तो सड़क पार करते हुए उसका एक्सीडेंट हो गया।


लोग उसे उठाकर अस्पताल ले गए।

वह कोमा में चला गया।

और उसके साथ ही

अरविंद सिंह के कमरे की एकमात्र चाभी भी बंद हो गई।


बाकी सभी चाभियाँ बेटे विदेश ले गए थे।

इसलिए वह कमरा उसी दिन से

हमेशा के लिए बंद हो गया।


अरविंद सिंह घंटों तक दरवाज़े को देखते रहे।

कभी प्यास से होंठ सूख जाते।

कभी भूख से पेट सिकुड़ जाता।

पर आवाज़ नहीं निकलती थी।


वह बस… सांस लेते रहे।

टूटती हुई सांसें…

कम होती उम्मीद…

और बढ़ती खामोशी।


🕰️ तीन महीने बाद…


ठीक तीन महीने बाद

बेटों की कार घर के सामने रुकी।

हँसी-मज़ाक, शॉपिंग बैग और पासपोर्ट हाथ में लिए

वे अंदर आए।


अभिषेक बोला

“राजू? कहाँ मर गया?”

पर कोई जवाब नहीं मिला।


करण ने देखा

पिताजी के कमरे पर ताला लगा था।


घबराहट में उन्होंने ताला तोड़ा।

दरवाज़ा खुला तो

एक भयानक बदबू बाहर फैली।


कमरे के बीचों-बीच

गद्दे पर एक सड़ी-गली लाश पड़ी थी…

चेहरा पहचान में नहीं आ रहा था।

हड्डियाँ दिखाई दे रही थीं।

लगता था महीनों तक किसी ने छुआ भी नहीं था।


वो अरविंद सिंह थे…

उनके अपने पिता…

जिन्होंने बेटों के लिए जान तक दांव पर लगाई थी…

जिन्होंने हर खुशी, हर सुविधा अपने बच्चों के लिए छोड़ी थी…


आज वही पिता

अकेले, भूख-प्यास से तड़पकर मर गए थे।


बेटों के पैरों तले ज़मीन खिसक गई।

रोते-रोते वे दीवार से टिक गए।

पर उनकी चीखों में

अब कोई जवाब देने वाला नहीं था।


💔 कहानी की सीख


यह कहानी सिर्फ अरविंद सिंह की नहीं—

यह उन हर मां–बाप की कहानी है

जो अपनी उम्र, मेहनत, पैसा, शरीर—

सब कुछ बच्चों के लिए लगा देते हैं।


पर एक दिन

उनकी ही ज़िंदगी एक बंद कमरे में

धीरे-धीरे खत्म हो जाती है।


बच्चों को

शायद यह समझ नहीं आता कि

बुजुर्गों को सिर्फ दवा और खाने की नहीं

बल्कि अपनेपन की, साथ की, और एक आवाज़ की जरूरत होती है।


🙏 अंत में…


ईश्वर करे,

ऐसी मौत किसी को न मिले।

ऐसा अपराध किसी बच्चे की आत्मा पर न लगे।

और ऐसे बूढ़े पिता

किसी ताले के पीछे अकेले सांस न लें।


यह कहानी सिर्फ कहानी नहीं

रिश्तों के बिखरते सच का आईना है।

💔




मंगलवार, 11 नवंबर 2025

किसी दूसरे चैनल पर वो डायनासोर आज भी साँस ले रहे हो



रात के सन्नाटे में, जब ब्रह्मांड अपनी अनंत गहराइयों में सोता नहीं…

कई वैज्ञानिक मानते हैं कि उस अंधेरे में ऐसे रहस्य लिपटे हैं

जिन्हें इंसानी आँखें अभी देख ही नहीं सकतीं।


प्रसिद्ध सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी "मिचियो काकू"एक चौंकाने वाली बात कहते है


संभव है, आपके बिल्कुल पास ही कोई डायनासोर मौजूद हो।

आप बस उसे देख नहीं पा रहे… क्योंकि आप दोनों अलग-अलग फ़्रीक्वेंसी पर कंपन कर रहे हैं।


ज़रा सोचिए…

जैसे रेडियो में अनेक चैनल होते हैं

हर चैनल पर एक अलग दुनिया, एक अलग संगीत।

लेकिन आप वही सुन पाते हैं,

जिस फ़्रीक्वेंसी पर आपका रेडियो ट्यून होता है।

बाक़ी चैनल हवा में तैरते तो रहते हैं,

पर आपकी चेतना उन्हें पकड़ नहीं पाती।

वैसे ही यह ब्रह्मांड भी शायद एक विशाल "कॉस्मिक रेडियो" है।

जहाँ हर चैनल पर एक अलग यूनिवर्स चल रहा हे

अपनी ही ऊर्जा, अपने ही नियम, अपनी ही कहानियाँ लिए हुए।

हम इस समय अपने वास्तविकता चैनल में बंद है


एक ऐसी फ़्रीक्वेंसी पर जो हमारी आँखों, हमारी इंद्रियों और हमारी सोच को सीमित रखती है।

लेकिन कल्पना कीजिए…

अगर कभी हम अपनी चेतना की कंपन आवृत्ति बदल सकें

तो शायद हम उन अदृश्य दुनियाओं की धड़कन सुन पाएं,

उन साए को देख पाएं

जो अभी हमारे ठीक सामने होकर भी हमारी आँखों से परे हैं।


कौन जानता है…

किसी दूसरे चैनल पर

वो डायनासोर आज भी साँस ले रहा हो,

धरती पर वैसे ही घूम रहा हो

जैसे करोड़ों वर्ष पहले घूमता था। 🦕




रविवार, 2 नवंबर 2025

यह कोई आम पुल नही हे 🤑

Atal Bridge  (Sabarmati Riverfront)


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📍 परिचय
  • यह पैदल पुल Ahmedabad (गुजरात) के Sabarmati नदी के किनारे स्थित है, जिसे ‘पैदल पैदल ओवरब्रिज’ कहा जाता है। 

  • पुल का नाम भारत के पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee के नाम पर रखा गया है। 

  • यह शहर के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों को नदी के दोनों किनारों से जोड़ता है, और अब सिर्फ एक पारगमन मार्ग नहीं बल्कि पर्यटन आकर्षण बन गया है। 


💡 निर्माण-विवरण

  • कुल लंबाई लगभग 300 मीटर है। 

  • चौड़ाई लगभग 10 से 14 मीटर तक है। 

  • इस पुल का निर्माण लागत लगभग ₹74 करोड़ थी। 

  • इसकी डिजाइन काइट (पतंग) से प्रेरित है, और इसमें रंगीन फ़ैब्रिक पैनल्स और LED-लाइटिंग जैसी आधुनिक सुविधाएँ हैं। 


📊 संख्याएँ एवं राजस्व

  • कहा जा रहा है कि पिछले तीन वर्षों में लगभग 77.21 लाख (7.721 मिलीऑन) लोगों ने इस पुल का दौरा किया है। 

  • इस अवधि में लगभग ₹27.41 करोड़ की कमाई हुई हे।

  • इस तरह अनुमानित रूप से निर्माण लागत का लगभग 37% सिर्फ टिकट द्वारा वसूला गया है। (यह दावा सोशल मीडिया पर किया गया है) 🤑


✔️ महत्त्व

  • यह पुल सिर्फ एक ट्रैफिक मार्ग नहीं है — यह एक पर्यटन स्थल बन चुका है, जहाँ लोग शाम-वक़्त सैर के लिए आते हैं। 

  • इसके कारण गुरुकिदित रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल रहा है — तरीके से राजस्व उत्पन्न हुआ है।

  • शहर की नदीफ्रंट की गुणवत्ता और सार्वजनिक स्थानों की संख्या बढ़ रही है, जिससे नागरिकों और पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल रहा है।


⚠️ ध्यान देने योग्य बातें

  • सोशल मीडिया पर दिए गए आंकड़े (77.21 लाख विजिटर, ₹27.41 करोड) की कमाई 😱 

  • स्वतंत्र स्रोतों द्वारा पूरी तरह पुष्टि नहीं हुए हैं।

  • टिकट मूल्य, विजिटर संख्या और राजस्व के गणित में कुछ अनुमान शामिल हो सकते हैं।

  • पुल की देख-भाल, सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन आदि चुनौतियाँ भी जुड़ी होंगी जब इतनी बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हों।


16 Psyche — एक अद्वितीय धूमकेतु-पिंड (ऐस्टरॉइड)

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16 Psyche — एक अद्वितीय धूमकेतु-पिंड (ऐस्टरॉइड)

❓ क्या है 16 Psyche?

  • 16 Psyche हमारे सौरमंडल के मुख्य ऐस्टरॉइड बेल्ट (जहाँ Mars और Jupiter के बीच) में स्थित एक असाधारण धूमकेतु-पिंड है। 

  • इसे लगभग 226 किलोमीटर (≈140 मील) चौड़ा माना जाता है। 

  • अधिकांश अन्य ऐस्टरॉइड के जैसे चट्टानी या बर्फे नहीं, बल्कि इसमें बहुत अधिक मात्रा में धातु (लोहा-निकेल आदि) मानी जाती है। 

  • वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह पिंड सम्भवतः किसी प्राचीन ग्रह के अंदरूनी धातु (कोर) का अवशेष हो सकता है — यानी क्रस्ट और मैण्टल हटने के बाद बचे हुए धात्विक भाग का हिस्सा।



🚀 Psyche (spacecraft) मिशन और प्रगति

  • इस मिशन को NASA द्वारा चलाया जा रहा है। लक्ष्य: 16 Psyche पिंड तक पहुँचकर उसे ऑर्बिट करना और उसकी धातु-संरचना, गुरुत्वाकर्षण, चुंबकीय क्षेत्र आदि का अध्ययन करना। 

  • लॉन्च की तिथि: 13 अक्टूबर 2023। 

  • ऑर्बिट में प्रवेश एवं अध्ययन कार्य अनुमानतः 2029 में शुरू होंगे। 

  • मिशन ने एक उन्नत तकनीक “लेज़र (ओप्टिकल) संचार” (Deep Space Optical Communications) का सफल परीक्षण किया है। 

  • अप्रैल 2025 में थ्रस्टर प्रणालियों में गिरावट आई थी, लेकिन मौसम-समय पर बैकअप सिस्टम के माध्यम से उसे पुनर्जीवित कर लिया गया। 


🔍 क्यों खास है यह पिंड?

  • अधिकांश ऐस्टरॉइड चट्टानी (rocky) या बर्फ वाले (icy) होते हैं; लेकिन 16 Psyche में धातु की मात्रा असाधारण है — यही इसे अध्ययन के लिए मूल्यवान बनाती है। 

  • यदि यह वास्तव में किसी ग्रह के कोर जैसा हिस्सा है, तो यह हमें सिखा सकता है कि धरती जैसी चट्टानी ग्रहों का “धातु कोर (metal core)” कैसे बना और विकसित हुआ। 

  • मीडिया में इसे कभी-कभी “सोने-प्लैटिनम से भरा ऐस्टरॉइड” के रूप में sensational रूप से पेश किया गया है 😅 

  • हालांकि वास्तविकता में इतना सरल नहीं है। 


⚠️ चेतावनियाँ एवं अभी की चुनौतियाँ

  • खुद इस धातु-पिंड तक इंसानों द्वारा खनन कर सामग्री लाना वर्तमान तकनीक से व्यावहारिक नहीं माना गया है। 

  • मिशन के दौरान तकनीकी चुनौतियाँ सामने आई हैं — जैसे थ्रस्टर समस्या, संचार प्रणालियों का परीक्षण आदि। 

  • “बहुत धातु है = असल में उतना मूल्यवान” ऐसा नहीं सरलता से कह सकते क्योंकि खनन, परिवहन, अर्थव्यवस्था सब मिलकर मायने रखते हैं। 


🧭 भविष्य क्या है?

  • आने वाला समय: 2026 में मार्स फ्लाई-बाई मिशन (मंगल का गुरुत्व सहायता) और 2029 में ऑर्बिट इनसर्शन। 

  • ऑर्बिट में अध्ययन के दौरान पिंड की सतह, संरचना, चुंबकीय क्षेत्र आयाम, रूप-रंग आदि का विवरण मिलेगा।

  • इससे ग्रह निर्माण, कोर गठन, ग्रह-सक्रियता (planetary differentiation) आदि जैसे बड़े सवालों के जवाब मिल सकते हैं।


 

शनिवार, 1 नवंबर 2025

“धड़ी” (या घड़ी) के बारे में कुछ इंटरस्टिंग फैक्ट्स

 

👆“धड़ी” (या घड़ी) के बारे में कुछ इंटरस्टिंग फैक्ट्स यहाँ हैं सरल और मज़ेदार भाषा में:


घड़ी (Watch/Clock) के बारे में Interesting Facts

1. घड़ी का आविष्कार समय नापने से पहले हुआ!

समय पहले सूर्य देखकर बताया जाता था—जिसे सूर्य घड़ी (Sundial) कहते हैं। इसके बाद पानी वाली घड़ी, रेत वाली घड़ी और फिर यांत्रिक घड़ियाँ आईं।


2. पहली कलाई घड़ी महिला के लिए बनी थी

पहली Wrist Watch किसी पुरुष के लिए नहीं, बल्कि एक महिला काउंटेस कैरोलीन मुरिएट के लिए 1810 में बनाई गई।


3. घड़ी में 10:10 पर सुइयाँ क्यों रखते हैं?

घड़ी के विज्ञापनों में सुइयाँ अक्सर 10:10 पर होती हैं, क्योंकि इस पोज़िशन पर:

  • ब्रांड का नाम साफ दिखाई देता है

  • सुइयाँ “स्माइल” जैसा आकार बनाती हैं

  • देखने में संतुलित लगता है


4. दुनिया की सबसे महंगी घड़ी

Patek Philippe Grandmaster Chime” घड़ी अब तक की सबसे महंगी मानी जाती है, जिसकी कीमत 200 करोड़ रुपये से भी ज्यादा में नीलाम हुई।


5. आपकी घड़ी आपके बारे में बताती है

  • डिजिटल घड़ी = तकनीक पसंद

  • एनालॉग घड़ी = क्लासिक स्टाइल

  • स्मार्टवॉच = हेल्थ और फिटनेस

  • लक्ज़री घड़ी = प्रीमियम टेस्ट


6. कलाई घड़ी लोगों को युद्ध ने पहनना सिखाया

पहले पुरुष जेब घड़ी रखते थे।
पहला विश्व युद्ध आया—सैनिकों को जल्दी समय देखने के लिए कलाई पर घड़ी बांधनी पड़ी।
इससे Wrist Watches लोकप्रिय हुईं।


7. घड़ी और वास्तु

वास्तु के अनुसार टूटी-फूटी या बंद घड़ी घर में नकारात्मक ऊर्जा लाती है।
चलती घड़ी को उत्तर या पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है।


8. टाइम ट्रैवल की शुरुआत भी घड़ी से

वैज्ञानिक समय की गति (Time dilation) को जांचने के लिए दो घड़ियों का इस्तेमाल करते हैं—एक तेज गति वाले जहाज़/उपग्रह पर और एक धरती पर।


3I/ATLAS क्या है? 👽

3I/ATLAS के बारे में **सच क्या है** और “Alien Object” वाली बातों की वास्तविकता:

✅ 3I/ATLAS क्या है? 👽

3I/ATLAS एक ‘इंटरस्टेलर कॉमेट’ है, यानी ऐसा पिंड जो हमारे सौरमंडल के बाहर से आया है।

यह पृथ्वी या सूर्य का स्थायी हिस्सा नहीं है — यह बस पास से गुज़रकर वापस अंतरिक्ष में चला जाएगा।

यह अब तक खोजे गए केवल **तीसरे इंटरस्टेलर ऑब्जेक्ट** में से एक है।

Though pictured here is 'Oumuamua, 3I/ATLAS is the latest interstellar comet lighting up the solar system. (VICTOR HABBICK VISIONS/SCIENCE P/Getty Images/Science Photo Libra)


  क्या यह एलियन तकनीक है?

नहीं। अभी तक इसके एलियन या कृत्रिम (Artificial) होने का कोई ठोस वैज्ञानिक सबूत नहीं है।

कुछ वैज्ञानिकों ने “संभावना” ज़रूर जताई थी कि यह चीज़ असामान्य है 

लेकिन NASA, ESA और अधिकांश खगोल-शास्त्री इसे एक सामान्य इंटरस्टेलर धूमकेतु (comet) मानते हैं।

✅ इसमें coma (गैस की चमकीली परत) और टेल (पूंछ) जैसी सामान्य धूमकेतु वाली विशेषताएँ दिखाई देती हैं।

✅ इसकी गति और trajectory भी स्वाभाविक रूप से comet जैसी है।

✅ अब तक कोई रेडियो सिग्नल, आर्टिफिशियल स्ट्रक्चर, मेटलिक पार्ट्स या टेक्नॉलॉजी जैसी चीज़ें नहीं मिलीं।

✅ लोग इसे “Alien Object” क्यों कह रहे हैं?

कुछ कारणों से सोशल मीडिया पर हाइप बना:

यह दूसरी दुनियाओं से आया है, तो लोग स्वाभाविक रूप से उत्सुक हो जाते हैं।

कुछ वैज्ञानिकों ने चर्चा की कि इसकी दिशा और गति थोड़ी अलग है

 — बस इसी पर कई YouTube/Instagram creators ने “Alien” थ्योरी फैलाना शुरू कर दिया।😅

* पिछली बार 1I/ʻOumuamua को भी कई लोगों ने UFO का शक बताया था — इसलिए 3I/ATLAS पर भी वही कहानी दोहराई जा रही है।

लेकिन वैज्ञानिकों के पास ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं है कि यह कोई एलियन जहाज है। 🤔

New images interstellar object 3I/ATLAS from various instruments reveal rapid brightening and a color bluer than the Sun. (Credit: Q. Zhang and K. Dattams)


29 अक्टूबर को क्या खास था?

29 अक्टूबर इसकी सबसे महत्वपूर्ण तारीख थी क्योंकि:

उस दिन यह सूर्य के सबसे पास पहुँच रहा था (Perihelion)
 सूर्य की गर्मी से धूमकेतु अधिक सक्रिय हो जाता है

वैज्ञानिक उसके धूल, गैस, चमक, गति आदि का अध्ययन कर सकते हैं

👉 लेकिन यह एलियन साबित करने के लिए कोई “टेस्ट” नहीं था।



यह सिर्फ वैज्ञानिक अवलोकन (observation) का एक अच्छा समय था।

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क्या यह पृथ्वी के लिए खतरा है? 🤗

नहीं। यह पृथ्वी से बहुत दूर से गुज़रा है।
हमारे पास आने का कोई खतरा नहीं था।




बुधवार, 18 जनवरी 2023

આઘાતજનક! બેંગલુરુમાં 71 વર્ષીય વ્યક્તિ સ્કૂટર પાછળ ઘસડી ગયો- જુઓ

નવી દિલ્હી: કર્ણાટકના બેંગલુરુમાં એક ચોંકાવનારી ઘટનામાં એક વ્યક્તિ ટુ-વ્હીલર પાછળ ખેંચાઈ ગયો. બેંગલુરુ પોલીસે વાહન ચલાવનાર વ્યક્તિની અટકાયત કરી હતી જ્યારે અન્ય વ્યક્તિ તેની પાછળ ખેંચાઈ રહ્યો હતો કારણ કે તેણે ટુ-વ્હીલરનો પાછળનો છેડો પકડી રાખ્યો હતો.

આ ઘટના બેંગલુરુના મગડી રોડ પર બની હતી અને ખેંચીને લઈ જનાર વ્યક્તિને ઈજા થઈ હતી અને હાલમાં તે શહેરની હોસ્પિટલમાં સારવાર હેઠળ છે.

સમાચાર એજન્સી એએનઆઈ દ્વારા શેર કરવામાં આવેલા ભયાનક ઘટનાના વીડિયોમાં, એક વ્યક્તિ ટુ-વ્હીલર ચલાવતો જોવા મળે છે જ્યારે અન્ય વ્યક્તિ સ્કૂટરને પકડીને તેની પાછળ રોડ પર ખેંચે છે. ડ્રાઈવર એક વાર પાછળ જુએ છે અને માણસને ખેંચતો જુએ છે પણ સ્કૂટર ચલાવતો રહે છે.

https://twitter.com/ANI/status/1615302033774612480?s=20&t=ZL4QsBxKkc9Kbsoa47QpBA

આ વ્યક્તિએ 71 વર્ષીય વૃદ્ધને ત્યાં સુધી ખેંચવાનું બંધ કર્યું નહીં જ્યાં સુધી તેને રસ્તા પરના અન્ય મુસાફરો દ્વારા અટકાવવામાં ન આવે. બેંગલુરુ પોલીસના જણાવ્યા અનુસાર કાર અને સ્કૂટર વચ્ચે અકસ્માત સર્જાયો હતો અને જ્યારે કાર ચાલકે સ્કૂટર ચાલકને રોકવાનો પ્રયાસ કર્યો ત્યારે તેણે ઝડપ કરી અને કાર ચાલકને તેની પાછળ થોડા અંતર સુધી ખેંચી ગયો.


"સ્કૂટર ચાલક હવે અમારી કસ્ટડીમાં છે. પીડિતા હાલમાં શહેરની હોસ્પિટલમાં તબીબી સારવાર હેઠળ છે. પીએસ ગોવિંદરાજ નગર ખાતેથી પોલીસે ટુ-વ્હીલર ચાલકની ધરપકડ કરી છે," ANiએ પશ્ચિમના DCP લક્ષ્મણ બી. નિમ્બર્ગીને ટાંક્યા.

 

शनिवार, 14 जनवरी 2023

ચાઈનીઝ માંજાના ઉપયોગ, વેચાણ કે સંગ્રહ સામે કડક કાર્યવાહીઃ પોલીસ

 ડીસીપીના જણાવ્યા મુજબ, 16 ડિસેમ્બર 2022 ના રોજ જાહેરનામા પછી શહેરમાં પતંગ ઉડાવવાથી મૃત્યુ અથવા કોઈ ગંભીર ઈજાનો કોઈ કેસ નોંધવામાં આવ્યો નથી.


અમદાવાદ શહેર પોલીસે 16 ડિસેમ્બરથી પતંગ ઉડાડવા માટે વપરાતા ચાઈનીઝ માંજાના જપ્તીના 170 કેસ નોંધ્યા છે, જ્યારે મકરસંક્રાંતિના તહેવાર પહેલા તેના પર પ્રતિબંધ અંગેનું જાહેરનામું બહાર પાડવામાં આવ્યું હતું અને પ્રતિબંધિતના ઉપયોગ, વેચાણ, સંગ્રહ અથવા ખરીદી સામે કડક પગલાં લેવાની જાહેરાત કરી હતી. કાચનો કોટેડ દોરો જે પક્ષીઓ, પ્રાણીઓ અને લોકોને ઇજા પહોંચાડે છે.


ગુરુવારે એક પત્રકાર પરિષદને સંબોધતા, ડેપ્યુટી પોલીસ કમિશનર (ડીસીપી) (નિયંત્રણ) અમદાવાદ, કોમલ વ્યાસે જણાવ્યું હતું કે, “મકરસંક્રાંતિ 2023ના સંદર્ભમાં, પાકું કૃત્રિમ સામગ્રી — બિન-બાયોડિગ્રેડેબલ સામગ્રી — જેને સામાન્ય રીતે 'ચાઈનીઝ ડોરી (માંજા) તરીકે ઓળખવામાં આવે છે. )', જે પક્ષીઓ, પ્રાણીઓ અને મનુષ્યોને ઈજા પહોંચાડે છે, તેના પર નેશનલ ગ્રીન ટ્રિબ્યુનલ દ્વારા ખરીદી, વેચાણ, સંગ્રહ, ઉપયોગ અથવા ઉત્પાદન પર પ્રતિબંધ મૂકવામાં આવ્યો છે... આવી પ્રવૃત્તિઓમાં સંડોવાયેલા કોઈપણ સામે ફરિયાદ નોંધવામાં આવશે," વ્યાસે જણાવ્યું હતું.


તેમણે ઉમેર્યું હતું કે, નફો કમાવવા અને આનંદ મેળવવા માટેની પ્રવૃત્તિઓ પક્ષીઓ, પ્રાણીઓ અથવા મનુષ્યોના જીવનની કિંમતે થઈ શકતી નથી.


અમદાવાદ પોલીસ કમિશનર દ્વારા 16 ડિસેમ્બર 2022ના રોજ જારી કરાયેલા નોટિફિકેશન મુજબ પ્રતિબંધિત તાર - ડોરી, માંજા, સ્કાય ફાનસ (ચાઈનીઝ તુક્કલ) અને પ્લાસ્ટિક થ્રેડના ઉપયોગ, ખરીદી, વેચાણ અથવા વિનિમય અંગે તપાસ કરવામાં આવશે. ડીસીપીએ જણાવ્યું હતું કે, શહેરના અધિકારક્ષેત્રમાં પતંગ ઉડાડવા માટે માત્ર કપાસના દોરાનો ઉપયોગ કરવાની મંજૂરી છે.


વ્યાસે એમ પણ જણાવ્યું હતું કે, કપાસના દોરાને કાચના પાવડર અને પક્ષીઓ, પ્રાણીઓ અને લોકોને નુકસાન પહોંચાડતા અન્ય રસાયણો સાથે કોટિંગ કરવાના વ્યવસાય સાથે સંકળાયેલા લોકોને નિરુત્સાહિત કરવા શહેર પોલીસ દ્વારા એક જાગૃતિ અભિયાન હાથ ધરવામાં આવશે.


ડીસીપીના જણાવ્યા મુજબ, 16 ડિસેમ્બર 2022 ના રોજ જાહેરનામા પછી શહેરમાં પતંગ ઉડાવવાથી મૃત્યુ અથવા કોઈ ગંભીર ઈજાનો કોઈ કેસ નોંધવામાં આવ્યો નથી.


“આ તે સમય છે જ્યારે મોટી સંખ્યામાં સ્થળાંતર કરનારા પક્ષીઓ જળાશયોની નજીક જોવા મળે છે… સવારે 7-8 થી સાંજે 6-7 વચ્ચેનો સમય નિર્ણાયક છે, કારણ કે આ કલાકો દરમિયાન, તેઓ ઉડે છે અથવા પાછા ફરે છે. તેમના માળાઓ. મકરસંક્રાંતિના તહેવાર પછી, આ તાર વૃક્ષો, વીજ વાયરો અને લેમ્પ પોસ્ટ પર લટકી જાય છે, જે પક્ષીઓને નુકસાન પહોંચાડે છે,” વ્યાસે ઉમેર્યું.

ડીસીપીએ ઉમેર્યું હતું કે ઈ-કોમર્સ વેબસાઈટ અને અન્ય ઓનલાઈન પ્લેટફોર્મ પર કેસ દાખલ કરવામાં આવશે જ્યાં પ્રતિબંધિત તાર વેચવામાં અથવા ખરીદવામાં આવે છે. “પોલીસ આવા ઓનલાઈન વેચાણના સ્ત્રોત સુધી પહોંચવાનો પણ પ્રયાસ કરી રહી છે. પ્રતિબંધિત તારોના ઉત્પાદન અથવા ખરીદી પાછળ કામ કરતું કોઈ મોટું નેટવર્ક હજી સુધી મળ્યું નથી, ”ડીસીપીએ જણાવ્યું હતું.


વ્યાસે જણાવ્યું હતું કે બુધવારે દાણીલીમડા પોલીસ સ્ટેશન દ્વારા 3 લાખ રૂપિયાની કિંમતની ચાઇનીઝ દોરાની લગભગ 900 રીલ જપ્ત કરવામાં આવી હતી. આઈપીસી કલમ 188 (જાહેર સેવક દ્વારા યોગ્ય રીતે જાહેર કરવામાં આવેલ આદેશનો અનાદર) અને 114 (ગુના કરવામાં આવે ત્યારે પ્રેરક હાજર) તેમજ ગુજરાત પોલીસ અધિનિયમની કલમો હેઠળ કેસ નોંધવામાં આવ્યો હતો. સરખેજ અને અમરાઈવાડી પોલીસ સ્ટેશનમાં સમાન કેસ નોંધાયા છે, એમ તેમણે જણાવ્યું હતું.

सोमवार, 2 जनवरी 2023

પેપર



 ચુંટણી પછીની બનેલી નવી સરકારમાં નવા વર્ષના પહેલા જ દિવસે પેપર ફોડીને ૨૦૨૩ ના નવા વર્ષમાં પણ પેપર ફોડવાની ભાજપની પરંપરા જાળવી રાખવા બદલ ગૃહમંત્રીને શિક્ષણ મંત્રીને તેમજ ભાજપના તમામ નેતાઓને અભિનંદન અને શુભકામનાઓ..

બીજલ જોષી

 


ગુજરાત નહીં ભૂલે એ થર્ટીફર્સ્ટની નાઇટ : બીજલ જોષીનો પરિવાર 19 વર્ષે પણ આઘાતમાં, ભાઈએ કહ્યું -આજેય નવા વર્ષના 10 દિવસ ઘરમાં જ પુરાઈને રહીએ છીએ.


વર્ષ 2022નો આજે છેલ્લો દિવસ છે, સૌકોઈ અમદાવાદીઓ થર્ટીફર્સ્ટનું સેલિબ્રેશન કરવા માટે થનગની રહ્યા છે, પરંતુ 2003ની થર્ટીફર્સ્ટની એ રાત અમદાવાદીઓ ક્યારેય ભૂલી નહીં શકે. જોકે આજની યુવા પેઢી ગુજરાતને હચમચાવનારી એ ઘટના અંગે જાણતી નહીં હોય. અમદાવાદમાં 2003ની થર્ટીફર્સ્ટની ઉજવણી કરવા માટે યુવા હૈયાં થનગની રહ્યાં હતાં. સૌકોઈ 31 ડિસેમ્બરની રાત પડવાની રાહ જોઈ રહ્યા હતા. જોકે એ સમયે આટલાં સંસાધનો અને ઉજવણીનો ઉન્માદ કે ઉદારતા નહોતી. આજે તો 2003થી લઈ અત્યારસુધીમાં બે દાયકા જેટલો સમય પસાર થઈ ગયો છે. હવે તો કોલેજિયનો હોય કે તેમના પરિવારજનો, ન્યૂયરની મન મૂકીને ઉજવણી કરે છે, પરંતુ બે દાયકા પહેલાં એક એવી ઘટના બની, જેણે સમાજની વિચારધારા અને રાજ્યની કાયદાકીય સ્થિતિને પણ ઉઘાડી પાડી દીધી હતી. 31 ડિસેમ્બરની રાત એટલે કે 2003 અને એ પછીનો દિવસ એટલે કે 1 જાન્યુઆરી 2004. 31મીની રાતના 10 વાગ્યાથી લઈ વહેલી સવાર સુધીના એ 5થી 6 કલાકમાં યુવતીની જિંદગી બર્બાદ થઈ જાય છે. 

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